शादी बिआह में देखऽ आजकल बस होखऽता शोबाजी ।
आशीष देबे माई बाबू ,चाहें होखे न राज़ी ।
दुल्हा दुल्हिन गुण ना दिल मिलऽल पतरा के देखाई ?
दूर आँख से पानी लाज बस देबे के बा बधाई ।
पूछा पाछी आ निमन्त्रण सभे वाटसैप से जाता।
बिआह के नेग चार ,रसम सगरो अब बिलाइल जाता।
किसिम किसिम के खाना अउर सजावट के देखावा बा।
पात के भोज ,पुड़ी , बुनिया, खाजा ,कसार , हेरात बा।
घर फ्लैट में समाईल टीना में माढ़ो तइयार बा।
भुलाइल लोक गीत अब तऽ फिल्मी गीतन के बहार बा।
नेवता में लिफाफा अउर पे टी एम के बा ज़माना ।
डेस्टिनेशन बिआह के चलन बा देखऽ लुटाता ख़ज़ाना ।
- सविता गुप्ता
राँची/झारखंड
परिचय-
सविता गुप्ता
पति – अरुण गुप्ता
तीन पुस्तकें प्रकाशित
१-घरौंदा-लघुकथा संग्रह
२-काव्य कलश -काव्य संग्रह
३-मन के अँगना में-भोजपुरी काव्य संग्रह
Mo-9650971129